योगी सरकार की सख्ती और निरंतर निगरानी का असरः 9 साल में खनन राजस्व 30 हजार करोड़ रुपये के पार

योगी सरकार की सख्ती और निरंतर निगरानी का असरः 9 साल में खनन राजस्व 30 हजार करोड़ रुपये के पार

सपा सरकार के पांच साल के दौरान मिले थे 4,700 करोड़, अब विभाग ने हासिल किया कई गुना अधिक राजस्व

योगी सरकार की पारदर्शी नीति का कमाल, अवैध खनन पर शिकंजे ने बढ़ाया प्रदेश का सरकारी खजाना

तकनीक के इस्तेमाल और कड़ाई से टूटा खनन माफियाओं का नेटवर्क, 66 अवैध खनन स्थलों पर हुई कार्रवाई

ई-नीलामी, एआई निगरानी व जीरो टॉलरेंस से बदली तस्वीर, खनन विभाग बना सुशासन का मॉडल

लखनऊ
 योगी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर प्रमुखता से काम कर रही है। सरकार प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इसके साथ भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित जांच व सख्त कार्रवाई पर जोर दिया जा गया। इसके चलते राज्य के खजाने में बढ़ोतरी हो रही है। उत्तर प्रदेश का भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है। विभाग में योगी सरकार के 9 वर्षों में 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। यह सपा सरकार के कार्यकाल में महज 4,700 करोड़ रुपये तक सीमित था। वहीं योगी सरकार में विभाग ने प्रदेश में 66 अवैध खनन क्षेत्रों की पहचान कर कार्रवाई की।

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उत्तर प्रदेश भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की सचिव एवं निदेशक माला श्रीवास्तव ने कहा कि यह उपलब्धि केवल राजस्व वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शी नीलामी, आधुनिक तकनीक के उपयोग, अवैध खनन पर सख्ती, डिजिटल सेवाओं के विस्तार व प्रभावी निगरानी व्यवस्था के कारण संभव हो सकी है। विभाग की प्राथमिकता है कि हर स्तर पर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भागीदारी बढ़ सके।

सपा सरकार के मुकाबले कई गुना अधिक बढ़ा राजस्व
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के कार्यकाल में खनन से कुल 4,700 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था, जबकि वर्ष 2017 से 2026 के बीच योगी सरकार के 9 वर्षों में यह बढ़कर 30,524 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस प्रकार योगी सरकार में खनन राजस्व में गुना ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का प्रमुखता से पालन किया गया। 

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राजस्व बढ़ोतरी के प्रमुख कारण

अवैध खनन पर तकनीकी निगरानी
अवैध खनन पर प्रभावी कार्यवाही के लिए निदेशालय में नई तकनीक पर आधारित पीजीआरएस प्रयोगशाला की स्थापना की गई। इस प्रयोगशाला में गूगल अर्थ की मदद से लगातार जांचकर अब तक 66 स्थानों पर अवैध खनन का पता लगाकर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की गई। इस कार्रवाई से 2.19 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके साथ अवैध खनन से जुड़े अपराधियों का नेटर्वक भी खत्म किया गया।

पारदर्शी नीलामी से बढ़ा राजस्व, पोर्टल से बढ़ी पारदर्शिता
वित्तीय वर्ष 2022-23 से अब तक प्रमुख खनिजों के 10 ब्लॉकों का कंपोजिट लाइसेंस व 3 ब्लॉकों की खनन पट्टों की सफल ई-नीलामी कर आवंटन किया गया, जिससे राजस्व के नए स्रोत विकसित हुए। इसके साथ खनिज संबंधी सेवाओं को ऑनलाइन करते हुए यूपी माइन मित्र पोर्टल विकसित किया गया। इसके माध्यम से 10 प्रकार की सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई गईं। लाखों आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण किया गया, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है।

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आईएमएसएस से अवैध परिवहन पर नियंत्रण
इंटीग्रेटेड माइनिंग सर्विलांस सिस्टम (आईएमएसएस), जियो-फेंसिंग, आएफआईडी टैग, एआई एवं आईओटी आधारित चेकगेट और ई-नोटिस प्रणाली लागू कर अवैध खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया। साथ ही खनिज परिवहन के लिए वीटीएस प्रणाली, जीपीएस आधारित वाहन निगरानी, राज्य पोर्टलों का एपीआई इंटीग्रेशन व ऑनलाइन निरीक्षण व्यवस्था लागू कर खनिज परिवहन को अधिक पारदर्शी बनाया गया।

वैकल्पिक निर्माण सामग्री को बढ़ावा दिया गया 
एम-सैंड नीति-2024 लागू कर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ वैकल्पिक निर्माण सामग्री को बढ़ावा दिया गया। साथ ही तकनीकी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया।

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